इलाहाबाद के संगम पर महाकुम्भ शुरू हो चुका है। भारत के अध्यात्मिक प्रभुत्व का सबसे ज्वलंत प्रतीक, धरती पर आस्था का सबसे बड़ा मेला! बारह साल बाद हो रहे इस वृहद् महासमागम ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है। लेकिन जिस एक पहलु ने हम सबको स्तब्ध किया है, वो है नागा साधुओं का रहस्यमयी जीवन और उनके त्याग-समर्पण का वृहद् दर्शन।
मेरा मानना है कि कम जानकारी और रहस्य किसी भी चीज़ का आकर्षण बढ़ा देता है। नागा साधु भी हमारे आकर्षण का केंद्र रहे हैं क्यूंकि सिर्फ कुम्भ के दौरान ही ये अपनी बैरागी दुनिया से निकलकर हमारी पूँजीवादी दुनिया से रू-बरु होते हैं। ...अरे नहीं नहीं, हम इनसे रू-बरु होते हैं; इनको भला क्या मतलब हमसे!
मेरा मानना है कि कम जानकारी और रहस्य किसी भी चीज़ का आकर्षण बढ़ा देता है। नागा साधु भी हमारे आकर्षण का केंद्र रहे हैं क्यूंकि सिर्फ कुम्भ के दौरान ही ये अपनी बैरागी दुनिया से निकलकर हमारी पूँजीवादी दुनिया से रू-बरु होते हैं। ...अरे नहीं नहीं, हम इनसे रू-बरु होते हैं; इनको भला क्या मतलब हमसे!
