पृष्ठभूमि है छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की जहाँ इन्द्रावती नदी के एक तट पर नक्सलीयों का पूर्ण कब्ज़ा है | कोई सरकारी कर्मचारी या पुलिस वहाँ वर्षों से नहीं गयी | कह सकते हैं कि वहाँ माओवादियों की ही सरकार चलती है | नदी के दूसरे तट के भूभाग पर नक्सल अधिकृत गाँव के विस्थापित शरणार्थी भारत सरकार द्वारा बसाए शिविरों में रहते हैं |
मेरी कविता इन्हीं में रह रहे एक पिता-पुत्र जोड़े के वार्तालाप की है | बेटे के पूछे जाने पर कि नदी के उस पार के दुश्मन कौन हैं जिन्होंने माँ को मार डाला, पिता भावुक हो जाता है क्यूंकि उसका अपना भाई भी एक माओवादी है |
मेरी कविता इन्हीं में रह रहे एक पिता-पुत्र जोड़े के वार्तालाप की है | बेटे के पूछे जाने पर कि नदी के उस पार के दुश्मन कौन हैं जिन्होंने माँ को मार डाला, पिता भावुक हो जाता है क्यूंकि उसका अपना भाई भी एक माओवादी है |
