January 17, 2013

नागा साधुओं का रहस्य..

इलाहाबाद के संगम पर महाकुम्भ शुरू हो चुका है।  भारत के अध्यात्मिक प्रभुत्व का सबसे ज्वलंत प्रतीक, धरती पर आस्था का सबसे बड़ा मेला!  बारह साल बाद हो रहे इस वृहद् महासमागम ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है।  लेकिन जिस एक पहलु ने हम सबको स्तब्ध किया है,  वो है नागा साधुओं का रहस्यमयी जीवन और उनके त्याग-समर्पण का वृहद् दर्शन


मेरा मानना है कि कम जानकारी और रहस्य किसी भी चीज़ का आकर्षण बढ़ा देता है।  नागा साधु भी हमारे आकर्षण का केंद्र रहे हैं क्यूंकि सिर्फ कुम्भ के दौरान ही ये अपनी बैरागी दुनिया से निकलकर हमारी पूँजीवादी दुनिया से रू-बरु होते हैं।  ...अरे नहीं नहीं, हम इनसे रू-बरु होते हैं; इनको भला क्या मतलब हमसे!



हर-हर-महादेव की हुँकार लगाते हुए इन नग्न सन्यासियों का गँगा-स्नान के लिए बेरोक-टोक बढ़ना कुम्भ की छटा पर चार-चाँद लगाता है।  माना जाता है कि प्रयाग में भागीरथी का जब सूर्य पुत्री यमुना से मिलन होना था तो अपनी उग्र प्रवृति के कारण गंगा ने यमुना में मिलने से इनकार कर दिया।  तभी त्याग और समर्पण का परिचय देते हुए बड़ी बहन यमुना ने संगम पे अपना अस्तित्व मिटा लिया।  गंगा शिव की प्रेयसि थी और नागा साधु शिव के परम भक्त होते हैं।  शायद यही कारण है नागा-साधुओं के गँगा-मिलन की आतुरता का।



आम तौर पर हमने सोलह श्रृंगार के बारे में तो सुना है, लेकिन ये नागा साधु अपने सत्रहवें श्रृंगार के लिए जाने जाते हैं।  सत्रहवां श्रृंगार है "भस्म" जोकि नागा साधुओं का एकमात्र परिधान होता है।  जी हाँ, अपने शरीर पर इस सफ़ेद भस्म और रुद्राक्ष की मालाओं के अलावा ये कुछ नहीं पहनते।  मान्यता है कि भगवान शंकर ऐसे ही ग्यारह हज़ार रुद्राक्ष मालायें धारण करते थे।


इनकी सबसे अहम् पहचान ये भस्म ही नागा साधुओं को याद दिलाता है कि उन्होंने जीते-जी अपने ही हाथों से अपना पिण्ड दान कर दिया है।  इश्वर के दिये दुनिया-दारी, सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया है।  मान और अपमान से परे इन साधुओं के वैराग्य की पहचान है ये भस्म!  ..और वैराग्य ही तो मोक्ष का द्वार है।।


कई अखाड़ों में बटे ये विचित्र सन्यासी अपने अपने महामंडलेश्वर के नेतृत्व में पहला शाही स्नान करते हैं।  ये एक्सक्लूसिव अधिकार सिर्फ इन्ही का है।  किसी भी कुम्भ मेले में आयोजकों की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि कहीं ये साधुगण रुष्ट ना हो जायें।  क्यूंकि नागा साधुओं के क्रोध और तांडव का सामना करने की क्षमता कम ही लोगों में हो सकती है।


इनकी रहस्यमयी जीवन-शैली और दर्शन के गांठों को खोल पाना नामुमकिन सा है क्यूंकि इन ज्वलनशील सन्यासियों को बिलकुल पसंद नहीं कि कोई इनके जीवन में झांके।  भारतीय अध्यात्मिक सभ्यता के ऐसे कई अनछुए पहलु हैं जो धर्म और आस्था को एक रहस्यमयी विषय बनाते हैं,  जिनको जान पाना,  समझ पाना बड़ा कठिन है।


या फिर शायद आस्था और भक्ति पर सवाल होना ही नहीं चाहिए ? कहीं ये समझने की चीज़ ही ना हो ?
फिर भी हम जैसे दलीलबाज़ लोग तो सवाल करते रहेंगे, भक्त इन सवालों को ही अपनी श्रद्धा का सर्टीफिकेट बनाता रहेगा।


ख़ैर छोड़िये,  आप बस कुम्भ के महासमागम की छटा का आनंद लीजिये, पुण्य कमाइये :-)

7 comments:

  1. Sawal Ye hai dost. Ki kahi Sradha aur apni parampara k naam pe hum log pichad to nhi rahe..!! Rhi baat naga sadhu ki.. to niswarth bhav se apne jeevan ka krm karte hue aatm-chintan se atma ka vikas krna he eshwar ko pana hai. Main bhavnao ko thes nhi pahuchata, parantu ek sawal jarur uthta hai mere andar ki Pooja-path, bhasm laga k jogi banne se eshwar ki prapti hoti ha ya yeh sirf apne karmo se bhagne ka ek tarika matr hai.?

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  2. Sawaal yeh nahi hai ki Raam hai ki nahin, jawab yeh hai ki log vishwas karte hain aur itte saaloan se aastha hai toh rehne dijiye na. Kya sawaal karna.

    Raam ji toh katghare mein gawahi dene bhi nahi aayenge. haan shayad door kahin khade ho kar muskurayenge ki dekhiye yeh hai Raamrajya.... koi bhi sawaal utha sakta hai... Raam par bhi

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  3. Sawaal yeh nahi hai ki Raam hai ki nahin, jawab yeh hai ki log vishwas karte hain aur itte saaloan se aastha hai toh rehne dijiye na. Kya sawaal karna.

    Raam ji toh katghare mein gawahi dene bhi nahi aayenge. haan shayad door kahin khade ho kar muskurayenge ki dekhiye yeh hai Raamrajya.... koi bhi sawaal utha sakta hai... Raam par bhi

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  4. Anupam, aap ka lekh maine pada, acha laga, kadachit sanymit bhi, parantu Naga eak prajati hai ye dekh aur sun k acha nhi pratit huwa !

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  7. Anupam ji mujhe lagta hai Ki Naga baba aur samast sadhu sirf insani chaule hai sab kuch insan aur ishwar inme vidhman hai bus searching Ki jarurat hai

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