August 30, 2010

उस पार मेरा भाई होगा..

पृष्ठभूमि है छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की जहाँ इन्द्रावती नदी के एक तट पर नक्सलीयों का पूर्ण कब्ज़ा है | कोई सरकारी कर्मचारी या पुलिस वहाँ वर्षों से नहीं गयी | कह सकते हैं कि वहाँ माओवादियों की ही सरकार चलती है | नदी के दूसरे तट के भूभाग पर नक्सल अधिकृत गाँव के विस्थापित शरणार्थी भारत सरकार द्वारा बसाए शिविरों में रहते हैं |
मेरी कविता इन्हीं में रह रहे एक पिता-पुत्र जोड़े के वार्तालाप की है | बेटे के पूछे जाने पर कि नदी के उस पार के दुश्मन कौन हैं जिन्होंने माँ को मार डाला, पिता भावुक हो जाता है क्यूंकि उसका अपना भाई भी एक माओवादी है |



उस पार हमारा दुश्मन है क्या

जो लूट मार हमें जाता है
ये किस से हम लड़ते हैं
ये कौन मेरा कहलाता है?


सो जा मुन्ना, मत पूछ
ये कटुसत्य है, दुःख होगा
उस पार तेरे अपने होंगे
उस पार मेरा भाई होगा


जहाँ ढोल नगाड़े बजते थे
आज अश्त्र बजता होगा
वहाँ नाच नृत्य होते थे
अब बारूदी सुरंग होगा


कोयल पपीहे चुप हो गए
विस्फोटों की प्रतिध्वनि में
पर न बोल उसे दुश्मन मेरा
उस पार मेरा भाई होगा


वो कहता था मत पूजो शिव को
माओ तुम्हारे भगवन हैं
चुनावों का बहिष्कार करो
इस लोकतंत्र से क्या होगा


ये कौन सी है विचारधारा
जो बाँट दे परिवारों को
ये कैसी है लड़ाई
जो खंडित करे समाज को


हिँसा नहीं निवारण
कौन इन्हें समझाएगा
संवेदनहीन परिचाय जिसका
वो कहाँ हमें ले जाएगा

वो सुबह कभी तो आएगी
गाँधी का स्वप्न सच होगा
जब सत्य, अहिंसा और न्याय
हर नर नारी अपनाएगा


उस अरुणोदय की मैं बाट जोहूँ
जब काला झंडा त्याग, तिरंगा हाथों में
मुझे बुलाता, आँखों में अश्रू लिए
उस पार मेरा भाई होगा..

13 comments:

  1. bahut badhiya ji........
    really a heart touching one...
    shat shat naman!!!!!!

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  2. Aap kaphi acha likhte hai.. Aur aapke lekhan ki vishishtata hai 'sabdo ka chayan' jo aapke lekhan ko prabhawshali banati hai. Aapki kavita bhi aapki anya rachnao ki bhanti sabdo se susajjit aur prabhawshali hai...!

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  3. anupam ji aapki kavita aati anupam hai , aap jo bhi karte ho dil se karte ho , gud luck

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  4. desh ki asht-wyashtata ko shabdo me jis samvedna se piroya gaya hai wah kabile taarif hai.

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  5. ekdum sai hai yr.bs yeh khna chahunga k tumhari kalam bht achi hai. . Ise kbi chodna mat. . Keep it up buddy.

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  6. काबिल ए तारीफ़..अनुपम जी.
    इतनी गंभीर सी समस्या को आपने धरातल से स्याह में उतर दिया है.
    नमन हो|

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  7. kaafi gahare paani utre ho dost...theek.......

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  8. गंभीर संवेदनशील चिंतन.

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  9. heart touching one

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  10. मार्मिक भाव। सच है भाई ही भाई को मार रहा है।

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  11. apki kavita kala drishti se achi h pr jhuthi h.adivasi pura din nachte nai rhte. vo apni jeevika k lye shram bhi krte hn. jb pure din hddiyan galane k bad 40 rs majduri milti h sahab to sare nach gaan rafu ho jate hn. aur apke shiv ne aj tak gribon k lye kya kiya h ? khne ko to sari kaynat unki muthi me h pr unse kuch bhukhe logon ka pet tk nai bhra jata. mao ne to karoron kisanon mjduron ko mukti ki rah dikhai thi. aur apka gandhivad bhi apke vicharon ki trha hi khokhla h. vo shoshan k khilaf sidhe sngharsh ko talta h aur mehnatkash vrg ko burjua varg k samne bhikhari bn ne ki sikh deta h. apka tirnga jhnda burjua varg ka jhnda h janab sarvhara varg ka nai. uska to sirf ek hi rng h lal aur ek hi jhnda h hnsiya aur hathoda. mjdur vrg usi k sath hoga

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